
Short notes for Has , allied services HPPSC , HPSSSB exam
बाबा कांशी राम जी को पहाड़ी गांधी के नाम से भी जाना जाता है इनका जन्म हिमाचल प्रदेश के डाडासीबा में हुआ जो की जिला काँगड़ा के देहरा उपमंडल में है । इनका जन्म 11 जुलाई 1882 में हुआ हुआ इनके पिता का नाम लखनु शाह और माता का नाम रेवती है 13 बर्ष की उम्र में माता पिता को खो दिया था । बाबा कांशी राम जी महात्मा गांधी के महान प्रशंसक तथा आजादी के प्रवर्तक थे
1905 में काँगड़ा घाटी में भूकम्प
1905 में काँगड़ा घाटी में आये भूकंप ने उनके मन में बहुत प्रभाव डाला । इस त्रासदी में बेसहारा और असहाय लोगों की मदद में बाबा जी ने सक्रिय भूमिका निभाई ।
1919 में जलियावाला बाग हत्याकांड
1919 में जालियां वाला हत्याकांड के बाद उनके भीतर का कवि हृदय जागा । महात्मा गांधी के सन्देश को लोंगो तक पहुँचाया । पहाड़ी भाषा में रचकर जन जन तक पहुंचाई । जलियांवाला बाग हत्याकांड के उपरांत ही उन्होंने महात्मा गांधी के सन्देश को उनकी कवितायों व् गीतों के माध्य्म से पहाड़ी भाषा में प्रसारित किया महात्मा के संदेशों का उन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा उन्होंने कसम खाई थी की जब तक भारतवर्ष आज़ाद नी हो जाता तब तक बो काले कपड़े ही धारण करेंगे
11 बार जेल के गये
1920 में 5 मई को पहली बार वह जेल गए उनके साथ लाला लाजपत राय भी थे । 1922 में उन्हें जेल से मुक्ति मिली थी । जेल जाने के बाद बापिस आने पर भी उन्होंने कवितायेँ लिखना नहीं छोड़ा 11 बार वह जेल गए अपने जीवन के 9 साल उन्होंने जेल के ही बिताये ।
23 मार्च 1923
23 मार्च 1931 को शहीद भगत सिंह , राजगुरु और सुखदेव सिंह को फांसी हुई तो बाबा जी इतने व्यथित हुए की आज़ादी मिलने तक काले कपडे पहनने का एलान किया, तो स्याहपोश जरनैल कहलाये ।
1934 में सरोजिनी नायडू ने उन्हें बुलबुल ए पहाड़ कहा ।
1937
1937 में पडिंत जवाहर लाल नेहरू ने होशियार पुर के गढ़दीवाला में कांग्रेस की सभा में पहाड़ी गांधी की उपाधि दी ।
1943 में मृत्यु
1943 में 15 अक्टूबर को उनका निधन हो गया , लेकिन उन्होंने आतिमं क्षण तक उन्होंने काले कपडे पहन कर रखे
बाबा कांशी राम जी का डाक टिकट
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनके नाम का डाक टिकट जारी किया था । बाबा कांशी राम जी ने 500 कविताएं लिखी और 8 लघुकथाएं लिखी । लाला लाजपत राय , लाला हरदयाल , सरदार अजीत सिंह और मौलवी बरकत उल्लाह के संपर्क में आने के बाद उनके जीवन का लक्ष्य ही बदल गया ।
11 जुलाई 2017
11 जुलाई 2017 को हिमाचल सरकार के मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह ने बाबा कांशीराम की 135 वीं जयंती के अवसर पर उनके घर का अधिग्रहण करने इसका संरक्ष्ण तथा स्मृति में एक स्मारक बनाने का निर्णय लिया ।
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